Author: sangeeta09
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ज्योतिबा फुले: भारतीय सामाजिक क्रांति के पुरोधा
आज दलित शब्द भारतीय समाज में सामाजिक-राजनैतिक पहचान के रूप में व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है। दलित चेतना को वैचारिक रूप देने, स्त्री-शिक्षा की नींव मजबूत करने और जाति आधारित भेदभाव के खिलाफ स्वर उठाने वाले ज्योतिबा फुले भारतीय समाज-सुधार आंदोलन की केंद्रीय हस्ती रहे। उन्होंने शूद्र-अतिशूद्र शब्द का प्रयोग करते हुए समाज के निचले तबकों के उत्थान पर जोर…
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1500 ईसा पूर्व से पहले भारत में कोई ब्राह्मण नहीं थे…
देवदत्त पटनायक 1500 ईसा पूर्व से पहले भारत में कोई ब्राह्मण नहीं थे… 100 ईसा पूर्व से पहले दक्षिण भारत में कोई ब्राह्मण नहीं थे। हड़प्पा शहरों में कोई ब्राह्मण नहीं थे। भीमबेटका गुफाओं में कोई ब्राह्मण नहीं थे। कीलाडी शहरों में कोई ब्राह्मण नहीं थे। ब्राह्मण यह मानने से इनकार करते हैं कि ब्राह्मणवादी…
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सामाजिक समरसता की अग्रणी पहल थी ‘मंडल विचार’ मासिक पत्रिका
नई दिल्ली, 6 नवंबर 2003 को सामाजिक समरसता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जाने वाली ‘मंडल विचार’ मासिक पत्रिका के प्रवेशांक का लोकार्पण नई दिल्ली स्थित संविधान क्लब के स्पीकर हाल में पूर्व प्रधानमंत्री वी. पी. सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर सिंह ने मंडल आयोग की अनुशंसाओं के क्रियान्वयन के बाद…
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बची रहे जो ‘अरावली’ तो दिल्ली रहे हरी-भरी!
अखिलेश यादव, पूर्व मुख्यमंत्री प्रिय दिल्लीवासियों,बची रहे जो ‘अरावली’तो दिल्ली रहे हरी-भरी!अरावली को बचाना कोई विकल्प नहीं है बल्कि ये तो संकल्प होना चाहिए। मत भूलिए कि अरावली बचेगी तो ही एनसीआर बचेगा।अरावली को बचाना अपरिहार्य है क्योंकि यह दिल्ली और एनसीआर के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच है या कहें क़ुदरती ढाल है। अरावली…
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सावित्री बाई फुले की कविताएँ
सावित्री बाई फुले की कविताएँ सावित्री बाई फुले की कविताएँ सावित्री बाई फुले की कविताएँ सावित्री बाई फुले की कविताएँ सावित्री बाई फुले की कविताएँ सावित्री बाई फुले की कविताएँ सावित्री बाई फुले की कविताएँ सावित्री बाई फुले की कविताएँ सावित्री बाई फुले की कविताएँ सावित्री बाई फुले की कविताएँ सावित्री बाई फुले की कविताएँ…